रुकी वो इसलिए कि प्राण बच जाएं

चली भी वो इसलिए कि प्राण बच जाएं


बनाया स्वयं को चिकित्सालय कि

जीवन का सवाल बच जाए


बच्चों को लेकर चली

कि न ई पीढ़ी का नौनिहाल बच जाए


चली लेकर मजदूरों को

कि पसीने का मान बच जाए


दौड़ेगी जल्दी ही देश की धड़कन

फिक्र बस यही कि हमारा हिन्दुस्तान बच जाए...

Jay Hind