तनिक गंभीर है, ये जो समस्या है,


डाक्टर साहब के पास पहुंचा लेकर अपनी कहानी,

समझा वमझा कुछ नहीं उन्होंने, बोले पिओ साफ पानी…


सिर पकड़ा मैं ने अपना,

कहा कि सुनो तनिक मेरी बात, समस्या तो ये है कि मैं बोलूं कैसे साफ वाणी?


फिर सारी बात समझाई उनको मैं ने मुंह जुबानी,

मीठे बोल ना पडते जिह्वा से, कड़वाहट की मेहरबानी,


डाक्टर साहब ने किया इशारा, कि कडवे बोल होते हैं गुरु जी सत्य ही की निशानी,

मीठे बोल चापलूसों के, क्यूं कर तुमने इसकी ठानी??


ऐसे बोल बोलो गुरु जी कि सत्य मीठा हो जाए,…. दिल दुखे ना किसी का, खुद को भी ठंडक मिल जाए।।

क्यूंकि मीठे बोल है पूर्णिमा, और कडवे बोल अमावस्या है

हां गुरु जी तनिक गंभीर है, ये जो समस्या है,