मजहब के नाम पर वो गले काट रहे रोज

और हमें वही पाठ दुबारा करो भाईचारे की खोज।।


पेरिस में कार्टून दिखाया कर दी शिक्षक की हत्या

कुछ को कटु अवश्य लगेगा पर है तो यही सत्य

दिल्ली में दंगा भड़काया मास्टरमाइंड ताहिर

आका ही इनके बैठे हैं नफरतों के माहिर

बहुत हुआ रोको अब कितने घाव दोगे

और कितनी आज़ादी लोगे और कितनी आज़ादी लोगे


विज्ञापन भी दोगले सारे सबका एक ही एजेंडा

आतंक नफरत जिहाद दंगा बस इन्हीं का ऊंचा झंडा

महिलाओं का शोषण करते बढ़ाते खूब आबादी

देश की बरबादी दिल में, जुबां पे अभिव्यक्ति की आजादी

बहुत हुआ रोको अब कितने घाव दोगे

और कितनी आज़ादी लोगे और कितनी आज़ादी लोगे