कुदरत का अजीब खेल है,

ज़िंदगी जितनी खुश दिखती है, उतनी खुश होती नही है,
मुश्किल जितनी आसान लगती है, उतनी आसान होती नही है,
मंज़िल जितनी नज़दीक दिखती है, उतनी नज़दीक होती नही है,
मिर्च जितनी तीखी दिखती है, उतनी तीखी वो होती नही है,
इंसान जितना खुदगर्ज दिखता है, उससे ज्यादा ही होता है,
इसलिए,
लोगों में अच्छाई, पानी में परछाई की असलियत,
बस एक छोटे से तिनके से बाहर आ जाती है ।