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अंत


अंत से भय खा करचेतना शून्यविवेक शून्यअस्थिरबेहालहोकरझूठ के पल्लू से लिपटताहूआ,एक निश्चित सत्य सेभागता हुआ; मानवहार करफिर उसीसत्यशून्यअंतमें विलिन हो जाता है।

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