आजादी का एक दीवाना,नाम भगत सिंह लिखता था। 
हंसते-हंसते शहीद हो गया,वह कैसा दीवाना था। 
बेटे का मैं ब्याह रचा दु,मां का यह अरमान था। 
बेटे के दिल में बस आजादी थी,उसी को दुल्हन माना था। 
चूम लिया फांसी का फंदा,वरमाला उसी को माना था। 
दो दोस्तों को संग लिए,फांसी पर वह झूला था।
निरंजन