प...
.तलाश
दिल घूम घूम करे
जब याद तेरी आये
मन हो बेचैन
आवाज दे तुम्हें
तेरी बातों को
देखा हवा में तैरते
तेरी हंसी को
सुना है सन्नाटे में
जाने अनजाने
तेरे क़दमों की
आहत सुनी
आँगन मेँ
शाम सबेरे
धुप छाँव में
तू है मौजूद
खेलती हो
लुका छिपी
मेरे से
रातों की लम्बी
कतारों की
तू बनी पहचान
जगाती हो मुझे
सारी रात
चाँद पूछे तुझे
तू छुईमुई सी
निकल कोने से
तारों से करे बात
भोर में दस्तक दे
जगाये मुझे
खोले दिल की
खिड़की
लुढ़क आयें यादें तेरी
दिल घूम घूम करे
... ..
कवि फोरम
उड़न ..
गड़बड़ झाला
रचना .निरंजन गौतम दत्त

