प...श्याम
घनश्याम
कोण गली गयो श्याम
में अभागन
देख न पायी
क्या करूँ अब श्याम
रूप धरो
मुंह छिपायो
मुरली छिपायो
में बेरन कित भई श्याम
तिनके तिनके खोजै
खोजा सबका हृदय
विशाल
पूछा पत्ते पत्ते से
डूब डूब देखा
यमुना का हर घाट
कहीं ना देखा
अपना बंसी वाला श्याम
कैसे खोजूं कैसे ढूँढू
कैसे मिलूं
तुम्ही बताओ अब
घन श्याम
में गरीब अनाथ
दिन हिन् बन जग घूमें
करे चाकरी मानव जात
कवि फोरम
... उड़न
...झाला
रचना.. ..निरंजन गौतम दत्त
कवि फोरम
उड़न खटोला
.......झाला
रचना....निरंजन गौतम दत्त


