वृंदावन
मैया मुझे
लागे वृंदावन निको
गलियां में घूमत नन्दलाल
धेनु चरावत जाईयो
मैया मुझे
लागे वृन्दावन निको
श्याम ख़ोजत राधे
बंशी बजावत कुँज बीच
मैया मुझे
लागे वृन्दावन निको
यमुना तीरे बैठी राधे
बाट ज्योही नन्द लाला
मैया मुझे
लागे वृंदावन निको
क़दम चढ़े कान्हा
ताके बरसाना श्रीजू
मैया मुझे
लागे बरसाना निको
रूठ गयी है राधे
मनावत है कृष्ण गोपाला
कवि फ़ोरम
उड़न खटोला
गड़बड़झाला
रचना.... निरंजन गौतम दत्त


