p. .ख़्वाब सुनहरी 

जवानी दीवाणी 


 सो जा राजकुमारी सो जा 

 नींद मांगे ख्वाब सुनहरी 

   देगा कोण उसे सिवाय तुम्हारे 

 ग़मशुदा दिल है तुम्हारा in

  नाज़नीन बनी नींद मोहरा 

  सो जा राजकुमारी सो जा 


  ख्वाबों में खुद को देखेंगी

  कहेगी बुनो सपने सुहाने 

  दिन में तुझे ही तरसाएँगे 

    दिल को एक कहानी मिल जाएगी 

    तड़फन एक तुम्हे मिल जाएगी 

   सो जा राजकुमारी सो जा 


  एक दिन अकेले तुम पाओगी 

  इसे ना तुम समझ पाओगी 

  खोने वाले को खोजोगी 

  कोई आया ही नहीं 

अभी तक 

   किसे तुम खोजोगी 

    सो जा राजकुमारी सो जा 


  भटकोगी दिन रात 

   तुम इसे ना जान पाओगी 

  बेचैनी दिल की कैसे 

 समझ पाओगी 

      ख्वाब करेंगे तुम्हें और परेशां  

    कोई गुनाह और तुम ना 

   ढूंढ पाओगी 

    सो जा राज कुमारी सो जा 


  पिंजरे मे दिल.है 

   रखो खुला रे खुला 

 उड़ने दो उसे 

    ताज़ी हवा के झोकों में 

     दिल की दुनिया तुम्हें अब 

   समझ में आएगी 

     नींद खुद बखुद तुम्हें बुलाएगी 

    मीठे सपने रात में दिखाएगी 

     सो जा राजकुमारी सो जा 


  कवि फोरम 

     उड़न खटोला 

     ...गड़बड़ झाला  

   रचना ..निरंजन गौतम दत्त