प.जिंदगी
क्या चीज़ है
जिंदगी
खट्टी क्या
कडुवी क्या
बस झेलनी है
बोध कराती
अपना अहसान
गुमान हमारा
ना स्वीकारे
चादर ओढ़े
उधार की
मोल.भाव करे
हमसे
ऊंच नीच
दुःख सुख
बस गम करे
रखे हमे बंधक
जीना है हमें
उड़ान ना सवाल
साँस साँस पर
करे सवाल
ओढ़े एक छीनी
चदरिया
औरों के पैरों से
बस जाना घाट है
मिटटी में
मिल जाना है
हमें ये बताये
ओ जिंदगी
काहे करे हमसे
इतने सवाल
कवि फोरम
रचना
निरंजन.गौतम.दत्त
