दीवानगी

  गीत मल्हार 


 तेरी खोज 

 मेरी मौज 

   कुदरत की तोल 

   दुनिया की बोल 


   दिल की चोट 

   मन की सोच 

   सुभह की पौध 

   दिन की बोझ 


   शाम की मौज 

    रात की मौन   

   सूरज की ओट 

   चाँद की खोट 


   आग की तपन 

   मन का भरम 

   दिल की जलन 

    उसकी कुढ़न  


   मेरी आवाज 

  तेरी मांग 

  साथ साथ 

   प्यासी प्यास 

   बुझाये कोण 


   जा ना दूर तू 

   मेरे पास तू 

   मेरे तेरे पास् 

    बस यही चाह 


   मय की बात 

   जाम के साथ  

   डर की ना बात 

   सपनों की रात 


   हवा का साथ 

  झूले झूला

  प्यार 

   आ