..तू है तो
में हूँ
गिला सिकवा
साथ है
राखे है जिन्दा
याद कर तेरी
अठखेलियां
रुक रुक साँसे
चले
रूश मनाई तेरी
देती गुदगुदी
रोके ना रुके हँसी
लम्बी रातें
नींद ना आवे
चांदनी भरपूर
करत किलोले
छत मोरे
साथ हम तुम
लागे जग है नहीं
दिन निकले
करे स्वागत भोर का
चिड़िया चहकें
दुनिया महकें
स्वागत करे
आँगन में घूप का
तू ना तो
कुछ ना हमरा
होकर भी
हो गया बेगाना
तू है तो
हूँ में
यादें तेरी
राखे जिन्दा
गिला सिकवा तेरा
साथ है
कवि फोरम
उड़न खटोला
..गड़बड़ झाला
रचना ..निरंजन गौतम दत्त


