गीत मल्हार 


 तेरी खोज 

 मेरी मौज 

  कुदरत की 

तोल 

   दुनिया की बोल 


   दिल की चोट 

  मन की सोच 

   दिन की बोझ 

   सुभह की पौध 


   शाम की मौज 

    रात की नराजगी  

   सूरज की ओट 

   चाँद की खोट 


   आग की जलन 

  मन का भरम 

   दिल की जलन 

   उसकी कुढ़न  


  मेरी आवाज 

 तेरी मांग 

  साथ साथ 

   प्यासी प्यास 

  बुझाये कोण 


   तू दूर ना जा 

  तू मेरे पास 

  मेरे तेरे पास् 

   और क्या चाह 


  मय की बात 

   जाम के साथ  

   डर की ना बात 

   सपनों की रात 


   हवा का साथ 

  झूले झूला

  प्यार 

  आ गायें दोनों 

   गीत मल्हार  

  

  

  कवि फ़ोरम

  गडबड़ झाला 

  उड़न खटोला

  रचना..निरंजन गौतम दत्त