दिल
साकी बात कर
दिल रोता है
तेरी बात
याद कर
तेरा आगोश
मेरी मंज़िल
दूर ना कर
मेरी पनाहगार
उमड़े दिल में प्यार
तेरी रज़ा क्या है
शर्माना तेरा
होठों का बुदबुदना
दीपक बाती
हिले हवा में
समझे कैसे हम
मीठी मीठी चुभन
होले होले
भरे प्यार
दिल में
पल्लू ना ढक
दिखा मुखड़ा
देख चितवन से
दिल का मुजरा
गाकर सुना
पुलक पाँवड़े
बिछे मेरे
तू आ देख
महफ़िल में अपना परवाना
दिल से दिल की
बतियाँ
हो जाने दो
सुधर जाइयाँ
दो जिंदगानियाँ
कवि फोरम
उड़न खटोला
गड़बड़ झाला
रचना ...निरञ्जन गौतम दत्त

