वो जो कभी कहते थे कि हम एक ही रूह हैं,
आज उन्हीं के पास मेरे लिए दो पल भी नहीं।
हम तो मशगूल थे उनके सपनों का घर सजाने में,
मगर उनकी नज़रों में अब हमारा कल ही नहीं।
तस्वीरें तो वही हैं, पर उनमें वो एहसास पुराना नहीं,
अब उन्हें मनाने का कोई बहाना भी काम आता नहीं।
ये कैसा मोड़ है जहाँ हम तन्हा खड़े रह गए,
कि अब रोना भी आता है, और उन्हें भुलाना भी आता नहीं।
