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खरी खरी


न काला धन वापिस आया,न लुटेरे वापिस आते हैं।

विकास देखता राह बेचारा,बैंक यारों पर लुटाए जाते हैं।

देश जले या हों महिलाएं निर्वस्त्र,हल से लेना-देना नहीं, बस मुद्दे उछाले जाते हैं।

— नीरज सोरखी
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