न काला धन वापिस आया,न लुटेरे वापिस आते हैं।विकास देखता राह बेचारा,बैंक यारों पर लुटाए जाते हैं।देश जले या हों महिलाएं निर्वस्त्र,हल से लेना-देना नहीं, बस मुद्दे उछाले जाते हैं।
न काला धन वापिस आया,न लुटेरे वापिस आते हैं।
विकास देखता राह बेचारा,बैंक यारों पर लुटाए जाते हैं।
देश जले या हों महिलाएं निर्वस्त्र,हल से लेना-देना नहीं, बस मुद्दे उछाले जाते हैं।