सांसों से सांसों की सरगम कुछ यूं जुड़े जिसमें हिसाब की फ़रमाइश न हो।

नदी नीर सा किनारा हो ऐसा जहां गिरने और उठने की कोई गुंजाइश न हो।

ख़ुशनुमा चांदनी बन रहूं तेरे दर्मियां कि किसी और जुगनू की रोश़नाई न हो।

प्यार के लब्ज़ों में कुछ यूं निखरूं कि सजने संवरने को गहनों की गुज़ारिश़ न हो।

तेरे अल्फ़ाज़ों की उरस्थल में हो कुछ यूं दस्तक कि खाली कोई आश़नाई न हो।

बंधन बंधे दिल से दिल का रूहानी कि #प्रियम कुछ और पाने की ख़्वाहिश न हो।