जब कोई रिश्ता गहराने लगता है, तो दिल चुपचाप चाहने लगता है-वो हमें पहले जैसा वक़्त दे, अहमियत दे, हर लम्हा हमारे साथ बाँटे। हम कहें या ना कहें, ये उम्मीदें हमारे भीतर पनपती रहती हैं।

लेकिन जब ये उम्मीदें टूटती हैं, तो जन्म होता है अभिमान का। छोटे-छोटे नजरअंदाज़ किए जाने से दिल भारी हो जाता है। फिर वही दर्द, धीरे-धीरे शिकायत बनकर उसी इंसान की ओर लौटता है जिसे हमने सबसे ज़्यादा चाहा था।