हां मुझे प्रेम हुआ
बस ये न पूछो कब और कैसे हुआ
चालीस के पार हुआ,या अड्डारह के बाद हुआ
मगर हां मुझे प्रेम हुआ
दिल मेरा धड़का दोनों ही बार था
मगर तब ये ना पता था कि ये प्यार था
इक्कीस में जाकर एहसास हुआ
प्यार क्या होता है,यह महसूस हुआ
मगर बांध लिया था खुद को, घर की जिम्मेदारियों में
मन को दबा लिया था, कहीं एक कोने कि अलमारी में
उम्र बढ़ी जिम्मेदारियां बढ़ी
शादी के बाद फिर खुद को ही भूल गई
वक्त बितता गया,समय के साथ सब बदल गया
तीस से अड़तीस का समय न जाने कब निकल गया
