लौट आओ…

अब कोई मलाल नहीं,
कोई सवाल नहीं।
जो बीत गया, वो बीत गया,
अब उसका कोई ख़याल नहीं।

तुमसे रूठे थे,
ख़ुद से भी ख़फ़ा थे,
मगर अब न कोई गिला है,
न कोई शिकवा बचा है।

दिल ने सब माफ़ कर दिया,
वक़्त ने सब सिखा दिया।
बस एक कमी है आज भी—
तुम्हारे बिना ये दिल
ख़ुद को अधूरा पाता है।

लौट आओ…
इस बार कुछ पूछूँगा नहीं,
कुछ कहूँगा नहीं।
बस तुम्हें देखूँगा
और चुपचाप कह दूँगा—
जो बीत गया, वो बीत गया…
अब तुम मेरे पास रहो...

बस एक तुम हो
और तुम्हारी राह तकती मेरी आंखें
कि लौट आओ
अब कोई मलाल नहीं