स्त्रियों को प्यार बहुत कम किया गया गया है
हमेशा देखा गया है उनके शरीर को
दरकिनार किया गया है
 उनके मन और आत्मा को
उनपर थोपे गए हैं सदा बन्धन,
 रखा गया है पर्दों में
उनको हमेशा खरीदा और बेचा गया है
उनको दिए गए हैं
 हमेशा प्यार और सम्मान के झूठे दिलासे
वह हमेशा रही हैं शिकार राजनीति, 
समाजनीति और परिवार नीति की
वह हमेशा ठगी गयीं हैं प्यार के नाम पर
 क्योंकि वह प्यार के महत्व को समझती रहीं ।
हर स्त्री की वास्तविक आकांक्षा सिर्फ प्यार है
लेकिन उसे प्यार बहुत कम किया गया है ।

नीरज निश्चल