
सड़क की सोंधी खुशबु में,
वो मेरा दिल महकता है,
बारिश की टप टप बूंदों से,
तेरा आँचल फिसलता है,
मैं कह कर भी न कह सकता
तुझे कितना मैं चाहता हूँ
भरे भौरों के उपवन में,
तेरी आवाज पाता हूँ।।
तूफानों से बिछड़कर भी,
ज़मी पर ढूंढ़ लाऊँगा।
सितारों के जहां में भी,
तेरी उम्मीद पाउँगा।
मेरी धरती को रोशन कर,
मेरे गीतों की धुन बन जा,
कड़े मौसम में- बूंदों में,
मेरी उजली किरण बन जा।।
हाँ नोसिखिया हूँ पागल मैं,
तेरी उम्मीद करता हूँ,
जतन ऐ लाख कर लूं पर,
मैं पानी सा फिसलता हूँ।
तेरे रंगों की दुनिया से,
नावाकिफ मैं पतंगा हूँ।
भले ऐ लाख जन्नत हों,
मैं तेरी लौ को चाहता हूँ।।
तू कहने को ही हाँ कर दे,
मेरे गीतों को- सपनों को,
मेरी आँखे तरसती हैं,
तेरी आँखों की साकी को,
दो रेशम के वो धागे दो,
उड़े जो तेरे क़दमों से,
मैं उन धागों को लेकर ही,
मेरा रुमाल पाउँगा।।
तेरी सांसों की खुशबु से,
मेरी ये रूह महकती है,
तेरी ज़ुल्फो की रौनक से,
मेरी शामें ठुमकती हैं,
वो सोने सा तेरा म
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