वक्त
रुकता नहीं किसी के लिए पर मेरे लिए उस पल से रुका है
जिस पल से साथ छोड़ा था तुमने
कोशिश तो बहुत की कि भागकर "कल" से "आज" में लौट आऊ
मगर हर दफा तुम्हारी यादों की महफूज चादर ओढ़, सच्चाई से दूर, वहीं रुक जाती हूं
इस उम्मीद में की तुम आओगे और फिर से मेरा हाथ थाम मुझे इस वक्त से आजाद कर दोगे
मगर तुम्हारा आना अब एक ख्वाब जैसा है
जिसे मन बहलाने के लिए हर रोज देख लेती हूं
पर तुम बहुत आगे निकल चुके हो
लेकिन मैंने अब तुमसे आगे बढ़ने की नाकामियाब कोशिशों में ही सुकून पा लिया है


