तुम्हारा ख्याल बरसात की तरह है

लेकिन सावन की बरसात नहीं,

बेमौसम बरसात

जब भी आता है, सब कुछ उथल पुथल कर देता है

मेहनत से सींची, सुकून की फसल उजाड़ देता है

पर अब इस खयाल से उतनी ही शांति मिलती है

जो बेमौसम बरसात के खत्म होने के बाद की सर्द हवाओं से होती है

एकदम रूहानी