यूँ ही नहीं ये दिन रात हुआ होगा सूरज से जल कर राख हुआ होगा। हमें तो गम है बर्बाद मुहब्बत का उनका भी दिल तो खाक हुआ होगा। मुकर्रर हुआ क्या हर फेरे को एक कुछ यूँ दिन हफ्ते में सात हुआ होगा। दागदारों के बीच अलग कैसे दिखता कोशिशों से दामन पे दाग हुआ होगा। बखूबी कांटों ने शायद काम किया है गुलाब इस तरह ही लाल हुआ होगा। घड़ियाँ बीतीं मेरी सदियों की तरह तुम्हारा भी हर पल साल हुआ होगा। वक्त हमेशा मिला तलवार की माफिक मेरी माँ का आशीर्वाद ढाल हुआ होगा।