तुझ सा नज़र मैं आऊँ कैसे
रोशनी से दौड़ लगाऊँ कैसे।
बुला रहा है दिल जमीर को
सोते हुए को मैं जगाऊँ कैसे।
मेरे बहाने भी सरकारी हुए
रूठे हो तुम मनाऊँ कैसे।
जाग उठी है फिर से गैरत
रोटी कपड़ा मैं कमाऊँ कैसे।
मिजाज जॉन सा हो रहा है
लबों से मोती लुटाऊँ कैसे।
काबू रखना है जज्बात पे
दबे को और दबाऊँ कैसे।
फरमान है तुम्हें न देखें
रब से नज़र हटाऊँ कैसे।