थोड़ी अना तो हम जुरुर रखते हैं
दिल को दिमाग से ज़रा दूर रखते हैं।
पिलाती हैं हँसती तो कभी रोती आँखें
कुछ यूँ मुसलसल हम सुरूर रखते हैं।
तलब है नवाबी की अब उन आँखों में
चलो उनका नाम अब हुजूर रखते हैं।
हल्का है ये बटुआ लेकिन खाली नहीं
इसमें माँ बाप का हम गुरूर रखते हैं।
खौफ नहीं तूफानों का इन चिरागों को
उनमें थोड़ा हम खुदा का नूर रखते हैं।