चलो दिखाता हूँ सफर तुम्हें हवा से कड़वी हवा का। ये जो कशमकश है जुरुरत और ख्वाहिश के बीच वो जलती है सुलगती है दिन रात सुबहो शाम उसकी रोशनी तो मादक है धुआँ भी निकलता है चिलम और सिगरेट वाली से जियादा खतरनाक वो बनाती है जिंदगी जहन्नुम हवा को कड़वी हवा।