पेड़ तले गिलहरी हो तो अच्छा लगता है
आंगन में जो बेटी हो तो अच्छा लगता है।
लाज ,हया,चूड़ी,पायल ये सब तो ठीक हैं
थोड़ा जो बहकती हो तो अच्छा लगता है।
कभी कभी बाग में खेलो सँग गुलाब के
उनके सँग महकती हो तो अच्छा लगता है।
अपनी आँखों से यूँ बहने न दूँगा तुमको
पलकों पे ठहरती हो तो अच्छा लगता है।
वैसे तो आँखें मेरी सब कुछ सुन लेती हैं
जुबाँ से जो कहती हो तो अच्छा लगता है।
तुम रात का चाँद हो, मैं सुबह का आसमाँ
बाहों में जो ढलती हो तो अच्छा लगता है।