मुझे तवज्जो मत दो,न ही मुझे तुम दाद दो इस रिश्ते को लेकिन न नफरत की खाद दो। ब्लैक होल है ये दिल,कुछ वापिस जाता नहीं घुट घुट के मर जाऊँगा,मुझे न कोई याद दो। नमकीन ,तीखा, कड़वा,हो गए हैं जायके मेरे यूँ बार बार आ कर मुझे,न मीठे का स्वाद दो। ऐ हुक्मराँ,पाबंदियों के तुम तो बादशाह हो आजाद क्यूँ है सोच मेरी,उसे भी तुम बाँध दो। रिश्ते अब सर्द हैं इतने ,जैसे रात पूस की जमी हुई बर्फ पिघला दे ,रात को वो चाँद दो।