मुझे जीते जी नहीं मरना है
मुझे आईने से नहीं डरना है।
सूखे पत्ते खुद झड़ जाते हैं
कहाँ टहनी पे उन्हें सड़ना है।
गैरों से जंग में तो खसारा है
खुद से ही तो अब लड़ना है।
हम भी मिट्टी तुम भी मिट्टी
ये मेरा तेरा क्या करना है।
मुझे आँखों से हैं बातें करनी
होठों से ही तुमको पढ़ना है।
बहती सी आँखों से वो याद
क्या मीठे पानी का झरना है।