
मेरे दामन पे कुछ दाग हैं,होंगे ही
इंसान हूँ, कुछ तो राज हैं , होंगे ही।
ये फ़कत शहर नहीं,कब्रिस्तान है
दफन कुछ रिश्ते औ गाँव हैं,होंगे ही।
बहुत कुछ कुचला है इस सफर में
जिस्म औ दिल पे तो घाव हैं,होंगे ही।
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