मेरे दामन पे कुछ दाग हैं,होंगे ही
इंसान हूँ, कुछ तो राज हैं , होंगे ही।
ये फ़कत शहर नहीं,कब्रिस्तान है
दफन कुछ रिश्ते औ गाँव हैं,होंगे ही।
बहुत कुछ कुचला है इस सफर में
जिस्म औ दिल पे तो घाव हैं,होंगे ही।
दिमाग को दिल से बहुत दूर रखा
उनके सर पे अब ताज हैं,होंगे ही।
बदन में खुशबू मेरी जेब में रौनक
अब तो गैर भी साथ हैं , होंगे ही।
दिल से नहीं अब वो पेट से गाते हैं
कुछ बेसुरे सुर साज हैं , होंगे ही।