मेरे चाँद की इक नज़र लो चाँद
थोड़ा सा उसका असर लो चाँद।
जलता है सूरज मेरे अन्दर
तुम अपनी रूह में भर लो चाँद।
हुआ है आसमान रौशन बहुत
रुख धरती का अब कर लो चाँद।
सितारों को ही कब तक पालोगे
मेरे चिरागों की खबर लो चाँद।
दिन भर कहाँ भटकते फिरते हो
तुम भी अब इक घर लो चाँद।
बहुत डराती है ये अमावस मुझे
उससे मेरी खातिर लड़ लो चाँद।