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मैं ज़िद में बैठा हूँ चाँद पाने के लिए

मैं ज़िद में बैठा हूँ चाँद पाने के लिए उसे नसीब नहीं रोटी खाने के लिए। यूँ इतराओ ना जो मुस्कुरा दिया मैंने मैं तो रूठा ही था मान जाने के लिए। कुछ देर में मिलेगा वो इसी मोड़ पे जो गया है छोड़ वापिस आने के लिए।
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