मैं सफर में रूकते हुए चलता हूँ बिखरे हसीन लम्हों को चुनते हुए चलता हूँ। कितना हसीन लगता है,शाम को ऊँघता आसमां मैं सूरज के साथ डूबते हुए चलता हूँ। यूँ ही नहीं जंगलों में भटकता फिरता हूँ मैं कोयल की कूक सुनते हुए चलता हूँ। हमेशा फैलती रहे हमारे किस्सों की खुशबू अपने इश्क की किताब लिखते हुए चलता हूँ।