क्या ये रिश्ता महज़ वायदों का है
ये मेल शायद दो कायरों का है।
बड़ी मुश्किल से तो ये रात कटी है
अब सूरज पे पहरा बादलों का है।
अब भी दिल है यहाँ लोगों के सीने में
इस तरह ये शहर घायलों का है।
यहाँ चोर भी मोहतरम,मोहतरमा हैं
हमारा मुहल्ला जनाब शायरों का है।
बिला इरशाद तो गज़ल पढ़ लें हम
मुद्दा तो लेकिन यहाँ कायदों का है।