क्या नर और क्या नारी यहाँ आयेगी सबकी बारी। मुझे मत तोलो,तुम सा हूँ कभी हल्का तो कभी भारी। प्याला हूँ मधुशाला का कभी छलका कभी खाली। ज़रा नुकीला है जूता मेरा नोक पे जिसके दुनियादारी। समंदर ठहरा पलकों पे बातें सूखी और ज़रा खारी।