क्या किसी और के ख़्वाबों में पल जाएँ
क्यूँ किसी एक की खातिर हम टल जाएँ।
अपनी भी अदा है ,चिंगारी से क्यूँ उलझें
जो जलना है जा सूरज पे हम जल जाएँ।
मौत जो बुला रही है तो पता हो उसको
हम आज ही आएँगे,भला क्यूँ कल जाएँ।
मेरी आहट को दस्तक मानेंगे ये गुमां है
इतने बुरे भी नहीं हम कि खल जाएँ।
गाँव का वो घर अब भी सुकूं देता है हमें
जिनको जाना है वो शौक से महल जाएँ।
स्कूल, अस्पताल ,बैंक अब गाँव में भी हों
क्यूँ बागवां उजड़े और फूल शहर जाएँ।
पानी, फूल,फल पेड़ उपजें प्रयोगशाला में
इससे पहले अच्छा हो हम सम्हल जाएँ।