
क्या किसी और के ख़्वाबों में पल जाएँ
क्यूँ किसी एक की खातिर हम टल जाएँ।
अपनी भी अदा है ,चिंगारी से क्यूँ उलझें
जो जलना है जा सूरज पे हम जल जाएँ।
मौत जो बुला रही है तो पता हो उसको
हम आज ही आएँगे,भला क्यूँ कल जाएँ।
मेरी आहट को दस्तक मानेंगे ये गुमां है
इ
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