कोई रो दे अगर तो बनावट कहते हैं चेहरे पे हँसी जो हो सजावट कहते हैं। मैय्यत में देखो कपड़ों में बेदाग सफेदी क्या इसे ही गम में मिलावट कहते हैं। गले मिले,हँस लिए,अलविदा कहा,बस क्या इसे ही रिश्तों में थकावट कहते हैं। थोड़ी चुटकी,मीठा तंज औ खंजर आँखें इस जमाने में इन्हें शराफ़त कहते हैं। हम भी थकते हैं और फिर सो जाते हैं चाँद जो सो जाए क्यूँ अमावस कहते हैं।