ख्वाहिशों के जेल में गिरफ्तार हो गया लोग कहते हैं वो समझदार हो गया। पहले आसां था जो महज़ इक इंसां था अब वो खुदा जो बना,दुश्वार हो गया। जंग ए जिन्दगी ये क्या किया तूने कभी खंजर तो कभी तलवार हो गया। अब बाजार में हूँ इक शय की तरह अब कहानियों का किरदार हो गया। शौक से इस कदर मुझे लूटा गया है मानो रमजान का मैं इफ्तार हो गया। मुझे अब किसी से शिकायत नहीं है वो कहते हैं शायद मैं बीमार हो गया।