खूँ दे कर भी भला होता है यूँ ही नहीं करबला होता है। मियाँ वो है पानी की बेचैनी जहाँ भी बुलबुला होता है। क्यूँ बुरा बोलें कीचड़ को उसमें कमल खिला होता है। दिलवाले कभी नहीं कहते धोखा इश्क का सिला होता है। क्यूँ न हो तिजारत रिश्तों में दिल दिमाग से मिला होता है। दे पाता है यहाँ रोशनी वही जो खुद ही तो जला होता है। पिता बन कर तुम देखोगे बुरा बन कर भला होता है।