
खुद से ही लड़ कर उठना है मुझे
थोड़ा गिरना है जो उड़ना है मुझे।
मेरे भीतर कुछ जकड़ सा गया है
अब तो थोड़ा सा पिघलना है मुझे।
गिरफ्तार सा हूँ मैं इस मकान में
माँ के आँचल में फिर रहना है मुझे।
मैंने ही तो पाला है ये रोग अना का
अब तो दर्द इसका सहना है मुझे।
मैं बिल्कुल ही तुम्हारे काबिल नहीं
तुम्हारी आँखों से अब बहना है मु
Read More! Earn More! Learn More!
