
खुद के अंदर जो मैं गिरफ़्तार हूँ
लोग कहते हैं कि मैं समझदार हूँ।
मानी मेरे लफ्जों को ढूँढ लेते हैं
ये न समझना कि मैं असरदार हूँ।
मतले तक ही तो सफ़र है मेरा
म्यान में फँसी हुई इक तलवार हूँ।
गुजर जाते हैं वो इक नज़र
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