कड़वा लिखता है ,क्या वो हँसता होगा
अकेला फिरता है , आदमी सच्चा होगा।
जब भी दिखता है,किसी सोच में रहता है
जमीर जिन्दा है ,शायद कच्चा होगा।
सिलवटें चेहरे पे , है बालों में सफेदी
सच बोलता है लेकिन,शायद बच्चा होगा।
गौर से एक दिन , उसकी आँखों में देखा
आईना मालूम हुआ,आदमी अच्छा होगा।