जमाना भला कितना बदल जाएगा
ज़िस्म ये गल जाएगा या जल जाएगा।
आदतन मेरा दिल तोड़ा फ़िर तुमने
आदतन इक अदा से ये बहल जाएगा।
रह आया वीरां महल,फरेबी शहर वो
देखना लौट कर वो फ़िर घर आएगा।
माना ये अच्छा है कि सच बोला जाए
इंतहा कर दी तूने, अब खल जाएगा।
हुई है फ़िर इक मुलाकात मुकर्रर
इक मुद्दा है फ़िर जो टल जाएगा।
हकीकत पता है तुझे और मुझे भी
आज़ ही जा तू भला क्यूँ कल जाएगा।
दुनिया को बदलने की तू बातें न कर
मेरा दिल बच्चा जो है , डर जाएगा।