जादुई आँखें
देखो कभी
उस निर्वस्त्र ,दुर्बल बच्चे की आँखें।
जादुई हैं।
किसी रेस्त्रां के सामने
वो भूखी आँखें
खा लेती हैं दो निवाले।
वो सूखी आँखें
बची खुची दो टपका कर
निगल लेती हैं,पचा लेती हैं ।
वो आँखें वाकयी जादुई हैं।
कभी देखो उनमें
बन आईना दिखा देंगी
ना सिर्फ तुम्हें तुमको
अपितु सच्चाई पूरे संसार की।
वो आँखें वाकयी जादुई हैं।
कभी गौर से झांको
निर्वस्त्र कर देती हैं
दुर्बल कर देती हैं।
उस निर्वस्त्र,दुर्बल बच्चे की आँखें।