एक ,दो क्यूँ चार भी हमारे हो सकते हैं
सफ़र में कितने भी ठिकाने हो सकते हैं।
बड़ी आसां होती है जंग खुद्दारों के साथ
बंदूक ,तलवार से घातक ताने हो सकते हैं।
उम्र के साथ जो निखरती हैं शराब ,गज़ल
फ़िर क्यूँ नहीं हम भी पुराने हो सकते हैं।
सोच समझ कर ही कुछ कहता हूँ उनको
आजकल के बच्चे भी सयाने हो सकते हैं।
खुद जोड़ा कुछ नहीं बस निचोड़ा सब को
मुफलिसी में अब वो घराने हो सकते हैं।
झील, आसमाँ और मौसम का हर मंजर है
उनकी आँखोँ में तो आशियाने हो सकते हैं।
हर इक पल को मैं भरपूर जीता हूँ
किसी गुज़रे लम्हे में जमाने हो सकते हैं।