हमें जिंदगी से कोई शिकायत नहीं है
जो जिन्दा हैं क्या ये इनायत नहीं है।
लहू के धब्बों को तेरा बोसा बताया
क्या काफी ये तेरी हिमायत नहीं है।
राम ,रावण,कंस,कृष्ण एक शख्स में
किरदारों में कोई किफायत नहीं है।
ये नहीं तो वो सही ,वो नहीं तो वो
फना इश्क में होना रिवायत नहीं है।
मतला शहजादा और मकता बादशाह
इस महफिल में कोई सदारत नहीं है।
यहाँ किलकारी गूंजेगी, मिट्टी फैलेगी
मियाँ ये घर है कोई इमारत नहीं है।
मुहब्बत चारागर , मुहब्बत दवा है
बेवजह ही इसकी हिफाज़त नहीं है।
समझे आँसू को मोती,मोती को मोती
अब जमाने में इतनी सदाकत नहीं है।