दुनिया को बदलना है क्या?मुश्किल है शायद खुद को ही परखना है क्या?मुश्किल है शायद। खुदगर्जी के बीज कुछ हमने बच्चों में बोए थे फल उनका चखना है क्या?मुश्किल है शायद। बड़े मजाकिए हैं आप, उम्दा तंज़ कसते हैं खुद पे ही हँसना है क्या? मुश्किल है शायद। शौर्य ,बल ,ख्याति की चाह गलत नहीं लेकिन सँग सूरज जलना है क्या? मुश्किल है शायद। गीता ,कुरआन ,बाइबल पे राय देते फिरते हैं कभी उन्हें पढ़ना है क्या? मुश्किल है शायद।